बिहारक पारंपरिक बावन बूटी साड़ी

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बिहारक पारंपरिक बावन बूटी साड़ीक सम्पूर्ण गाइड। नालंदाक बुनकर द्वारा साड़ी पर उकरल ५२ टा बौद्ध मोटिफक इतिहास आ बुनाईक तकनीक सहज भाषामे जानू।

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हमর देशक हर पारंपरिक साड़ीक बनावट आ तकनीकक पाछाँ कोनो न कोनो गणितीय हिसाब आ धार्मिक विश्वास नुकैल रहৈत অछि। तहिना बिहारक एकटा बहुत प्राचीन, आध्यात्मिक आ महीन बुनाई कला थিক ‘बावन बूटी साड़ी’ (Bawan Buti Saree)। ई केवल कोनो साधारण कपड़ा नहि थिक, बल्कि कपड़ा पर धागाक सटीक गणनासँ बौद्ध इतिहासक अध्याय उकरबाक विशिष्ट लोककला थিক। आज Vunavya क एहि विशेष ब्लॉगमे हम सब चर्चा करब बिहारक नालंदा क्षेत्रक एहि अद्भुत हस्तशिल्पक इतिहास आ एकर विशेषताक बारेमे।

১: बावन बूटी साड़ीक इतिहास — नालंदाक बौद्ध परंपरासँ जीआई टैग धरि

‘बावन बूटी’ शब्दक मूल अर्थ एकर संख्याक कौशलसँ जुड़ल अछि। मैथिली आ हिंदी भाषामे ‘बावन’ क अर्थ ५२ (Fifty-Two) होइत अछि।

  • बौद्ध संस्कृतिक प्रभाव: प्राचीन समयमे नालंदा महाविहार आ भगवान बुद्धक क्षेत्रक आसपासक बुनकर सब एहि साड़ीक बुनाई शुरू कएने छलाह। अतः एहि साड़ीक डिज़ाइन पर बौद्ध दर्शनक गहीर प्रभाव अछि। वर्तमान समयमे एहि सुंदर सूती आ तसर सिल्कक साड़ीकेँ आधुनिक महिला लोकनि बहुत पसंद कए रही छथि। एकरा भेटल जीआई टैग (GI Tag) एहि कलाकेँ वैश्विक बजारमे एकटा ऊँच स्थान देने अछि।

২: बुनाईक तरीका आ मोटिफ — ५२ टा बूटी आ अतिरिक्त वेफ्टक मेल

बावन बूटी साड़ीक सबसँ पैघ सुंदरता एकर सटीक गणितीय बुनाई आ मोटिफ (बूटी) क महीनपनमे अछि। ई देखबामे बहुत सुंदर लगैत अछि मुदा एकर बनैबाक तरीका बहुत जटिल अछि।

  • अतिरिक्त वेफ्टक जादू: एहि साड़ीक मुख्य कपड़ा पर बुनकर सब अलगसँ धागा दए कऽ (Extra Weft Technique) डिज़ाइन बनबैत छथि। पूरा साड़ी पर एकदम बराबर दूरी कए हिसाबसँ ५२ टा छोट-छোট बूटी बुनल जाइत अछि।
  • कमल, स्तूप आ चक्रक मोटिफ: साड़ीक आँचल आ पाड़िक डिज़ाइन मुख्य रूपसँ बौद्ध धर्मक पवित्र प्रतीक जेना— कमल, बौद्ध स्तूप आ धर्मचक्रक माध्यमसँ उभरैत अछि। ई विशिष्ट बनावट आधुनिक फैशन प्रेमी लोकनिकेँ बहुत आकर्षित करैत अछि।

निष्कर्ष

बिहारक बावन बूटी साड़ी हमरा सबकेँ सीखबैत अछि जे कोना साधारण करघा आ सूई-धागासँ कपड़ा पर इतिहासकेँ अमर कएल जा सकैत अछि। एहि अमूल्य विरासतकेँ विश्वक मंच पर आनबाक लेल Vunavya हमेशा गर्वक संग काज कए रहल अछि।

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