नागालैंड के जीआई टैग नागा शाल की पूरी गाइड। आओ, अंगामी और चाखेसांग जनजातियों के शाल की बुनाई और लाल, काले व सफेद रंगों का सामाजिक महत्व आसानी से जानें।
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भारत के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित नागालैंड को ‘उत्सवों की भूमि’ कहा जाता है। पहाड़ियों और जनजातीय परंपराओं से घिरे इस राज्य की संस्कृति का सबसे सुंदर हिस्सा यहाँ की बुनाई कला है। आज Vunavya के इस विशेष मास्टर ब्लॉग में हम नागालैंड की प्रसिद्ध नागा शाल (Naga Shawls) के गहरे इतिहास और इसके रंगों के भीतर छिपे प्रतीकवाद को विस्तार से जानेंगे।

१: जनजातीय विविधता — चाखेसांग, आओ और अंगामी शाल
नागालैंड में १६ से अधिक प्रमुख जनजातियाँ रहती हैं। इनमें चाखेसांग (Chakesang), आओ (Ao) और अंगामी (Angami) जनजातियों के शाल विश्व भर में सबसे लोकप्रिय हैं।
- आओ जनजाति का ‘त्सुंगकोतेपसु’ (Tsungkotepsu): यह आओ नागा पुरुषों की वीरता का प्रतीक है। इस शाल के बीच में एक सफेद पट्टी होती है, जिस पर काले धागे से हाथी, बाघ, मुर्गे और इंसानी सिर की आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
- अंगामी जनजाति का ‘लोहे’ (Lohe): इस शाल की जमीन मुख्य रूप से गहरी काली होती है। दूसरी ओर इसके दोनों किनारों पर चौड़ी लाल और हरी धारियाँ (Stripes) होती हैं, जो इसे बहुत आकर्षक लुक देती हैं।

२: रंग और प्रतीकों का अर्थ — लाल, काले और सफेद रंग का जादू
नागा शालों की बुनाई में मुख्य रूप से तीन रंगों का उपयोग सबसे अधिक होता है— लाल, काला और सफेद। नागा समाज में इन रंगों का बहुत गहरा सामाजिक महत्व है।
- लाल और काला रंग: नागा संस्कृति में लाल रंग साहस, शक्ति और वीरता का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन काल में युद्ध जीतने वाले योद्धाओं के शाल में इस रंग की प्रधानता होती थी। वहीं काला रंग शाल का मुख्य आधार होता है, जो मिट्टी से जुड़ाव और मजबूती को दर्शाता है। इसके अलावा शाल पर बने पशुओं के मोटिफ व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा और उसकी संपत्ति को दर्शाते हैं।

निष्कर्ष
नागालैंड का नागा शाल हमें सिखाता है कि कैसे कपड़ा समाज के गौरव को संजोकर रख सकता है। इस अमूल्य पहाड़ी विरासत को वैश्विक मंच पर लाने के लिए Vunavya हमेशा तत्पर है।
