वस्त्र विरासत

मेघालय की 3 पारंपरिक वस्त्र कलाएं

मेघालय की पारंपरिक कपड़ा कला की पूरी गाइड। अहिंसक एरी सिल्क (राइंडिया), खासी महिलाओं की धारा और ज़ैनसेम और गारो डाकमंदा का इतिहास और बुनाई तकनीक आसानी से जानें। Read this in –English/বাংলা/অসমীয়া भारत के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित मेघालय को ‘बादलों का घर’ कहा जाता है। पहाड़ियों और देवदार के जंगलों से घिरे इस […]

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मणिपुरी महिलाओं के पारंपरिक परिधान फनेक और इनाफी की पूरी कहानी

मणिपुरी मेतेई महिलाओं के पारंपरिक पहनावे फनेक और इनाफी की पूरी गाइड। दैनिक परिधान से लेकर उत्सवों के आभिजात्य तक—इसका इतिहास और बुनाई तकनीक आसानी से जानें। Read this in- English/বাংলা/অসমীয়া मणिपुर की संस्कृति में महिलाओं का स्थान बहुत ऊँचा है। उनकी आत्मनिर्भरता और सुंदरता की एक बड़ी झलक उनके पारंपरिक पहनावे में दिखाई देती

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मणिपुर के पारंपरिक शफी लानफी और लैरम फी की कहानी

मणिपुर के पारंपरिक शफी लानफी और लैरम फी की पूरी गाइड। वीर योद्धाओं की शाल और अतिथियों के सम्मानजनक स्कार्फ का इतिहास और बुनाई तकनीक आसानी से जानें। Read this in- English/বাংলা/অসমীয়া मणिपुर की कपड़ा कला केवल अपनी बारीक बुनाई के लिए ही नहीं जानी जाती है। दरअसल, यहाँ के हर कपड़े के पीछे समाज

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आभिजात्य की बुनाई मणिपुर: जीआई टैग्ड मोइरांग फी और वांगखेई फी की पूरी गाइड

मणिपुर के जीआई टैग टेक्सटाइल की पूरी गाइड। मोइरांग फी के मंदिर के मोटिफ और वांगखेई फी के जाल जैसी बारीक बुनाई का इतिहास और तकनीक जानें। Read this in – English/অসমীয়া/বাংলা भारत के उत्तर-पूर्व के रत्न मणिपुर केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि उसके समृद्ध हस्तशिल्प और बुनाई कला के लिए

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अरुणाचल प्रदेश की 4 पारंपरिक वस्त्र कलाएं

पहाड़ों पर धागों की अल्पना:अरुणाचल प्रदेश के वस्त्र Read this in – English/বাংলা/অসমীয়া भारत के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित अरुणाचल प्रदेश को ‘उगते सूरज की भूमि’ कहा जाता है। पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरे इस राज्य में कई जीवंत जनजातियाँ रहती हैं। अरुणाचल की महिलाएँ सदियों से अपने पारंपरिक कमर-करघे (Loin Loom) पर ऐसे

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हिमालय की बुनाई गाथा:सिक्किम की ३ सबसे प्रसिद्ध कपड़ा विरासत

हिमालय की बुनाई गाथा: सिक्किम की पारंपरिक लेप्चा थारा, पांगदेन और भूटिया कालीन की कहानी Read this in – English / বাংলা / असमिया कंचनजंगा की बर्फ से ढकी चोटियाँ और छांगू लेक का नीला पानी— सिक्किम का नाम लेते ही यह रूप हमारी आँखों के सामने आ जाता है। लेकिन इस पर्वतीय क्षेत्र की

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राजबोंगशी बुनकर कला और पीले-हरे रंगों की पारंपरिक जुगलबंदी

उत्तर बंगाल की मिट्टी की महक: राजबोंगशी टेक्सटाइल की विरासत और पीले-हरे रंगों का जादू | Vunavya Read this in – English / বাংলা /অসমীয়া उत्तर बंगाल का नाम लेते ही डुआर्स के घने जंगल और तीस्ता-तोर्सा की रूपहती धाराएं आँखों के सामने तैरने लगती हैं। लेकिन इसी प्रकृति की गोद में कोचबिहार और जलपाईगुड़ी

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दार्जिलिंग और कालिम्पोंग की प्राचीन ‘लेपचा बुनाई’ और बैकस्ट्रैप लूम का जादू

उत्तर बंगाल की पहाड़ी विरासत: दार्जिलिंग और कालिम्पोंग की प्राचीन लेपचा बुनाई (Lepcha Weaves) | Vunavya Read this in – English /বাংলা / অসমীয়া उत्तर बंगाल के पहाड़ों का नाम लेते ही हमारी आँखों के सामने कोहरे से घिरा दार्जिलिंग या कालिम्पोंग का जादुई रूप और सुगंधित चाय उभर आती है। लेकिन इसी हिमालय की

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माजुली की वस्त्र कला: आध्यात्मिक सत्र संस्कृति

माजुली के पारंपरिक वस्त्र: सत्र संस्कृति और जनजातीय बुनाई का एक अद्भुत समागम | Vunavya Read this in-English/বাংলা/असमिया ब्रह्मपुत्र नदी के सीने पर तैरता विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप ‘माजुली’ केवल एक भूभाग नहीं है, बल्कि यह असम की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का धड़कता हुआ दिल है। महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के नेतृत्व में

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बंगाल का पारंपरिक करघा बनाम असम का जादुई ‘लॉयन लूम’ और ‘थ्रो-शटल’

करघा शाला के भीतर: बंगाल का पारंपरिक करघा बनाम असम का जादुई ‘लॉयन लूम’ और ‘थ्रो-शटल’ Read this in – English/বাংলা/অসমীয়া एक आदर्श हैंडलूम साड़ी या मेखला चादर की हर तह में बुनकर का कौशल छिपा होता है। लेकिन यह कौशल जिस यंत्र के माध्यम से व्यक्त होता है, वह है करघा या लूम (Loom)।

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